राजयोग का अर्थ है “राजा योग” या “श्रेष्ठ योग”। यह ब्रह्माकुमारीज़ द्वारा सिखाया जाने वाला सरल, सहज और वैज्ञानिक ध्यान है। इसमें शरीर की कोई विशेष मुद्रा, प्राणायाम या मंत्र जाप की आवश्यकता नहीं होती। यह खुली आँखों से किया जाता है और कहीं भी, कभी भी अभ्यास किया जा सकता है।
राजयोग का मूल आधार है – आत्मा चेतना। हम स्वयं को शरीर नहीं, बल्कि एक चैतन्य प्रकाश-बिंदु (आत्मा) के रूप में अनुभव करते हैं और परमपिता परमात्मा (शिव बाबा) से सीधा संबंध स्थापित करते हैं। यही संबंध हमें शांति, शक्ति, पवित्रता और आनंद से भर देता है।
आँखें खुली रखकर सहज बैठें। विचार करें – “मैं यह शरीर नहीं हूँ। मैं एक शांत, पवित्र और शक्तिशाली आत्मा हूँ – एक छोटा सा प्रकाश-बिंदु माथे के बीच में।”
अब परमपिता परमात्मा को एक दिव्य प्रकाश-बिंदु के रूप में याद करें। अनुभव करें कि वे शांति, प्रेम, पवित्रता और शक्ति के सागर हैं और आप उनके बच्चे हैं।
परमात्मा से शांति, प्रेम, शक्ति और आनंद लेते हुए अनुभव करें। यह संबंध दिनभर चलते-फिरते, काम करते हुए भी बनाए रखा जा सकता है।
राजयोग कोई धर्म, रीति-रिवाज या कठिन साधना नहीं है। यह सभी उम्र, जाति और पृष्ठभूमि के लोगों के लिए खुला है। ब्रह्माकुमारीज़ के सभी केंद्रों पर निःशुल्क ७-दिवसीय राजयोग कोर्स उपलब्ध है, जिसमें आत्मा, परमात्मा, कर्म सिद्धांत, समय चक्र और ध्यान की विधि सिखाई जाती है।
नियमित अभ्यास से आत्मा अपनी मूल दिव्य अवस्था – शांति, पवित्रता, प्रेम, आनंद और शक्ति – को पुनः प्राप्त करती है। यही राजयोग का वास्तविक फल है।